Lal Bahadur Shastri Essay In Hindi सभी धोरण 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के लिए लिखा गया है आप इस लाल बहादुर शास्त्री पर हिन्दी निबंध को अपने अभ्यास और परीक्षा में उपयोग में ले सकते है।
Lal Bahadur Shastri Essay In Hindi-लाल बहादुर शास्त्री पर हिन्दी निबंध
आज कल के ब्रस्ताचारी राजनैतिक युग में लगता ही नहीं की हमारे देश में भी कभी ऐसे सच्चा और ईमानदार नेता थे। लाल बहादुर शास्त्री भारत के गणतंत्र में जुड़ने वाले एक नेता थे। लाल बहादुर शास्त्री देश के सच्चे सपूत थे। लाल बहादुर शास्त्री का जीवन गांधीजी के आन्दोलन से सरु हुआ था। उन्होंने जो देश के प्रति अपने जीवन का समर्पण दिया था वो देशवाशी कभी नहीं भूल पाएंगे।
लाल बहादुर शास्त्री पर हिन्दी निबंध
लाल बहादुर शास्त्री का प्रारंभिक जीवन :- २ अक्टुम्बर 2004 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय गांव में लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। उनके माता का नाम रामदुलारी था और पिता को सब मुंशीजी कहते थे। अपने परिवार में सबसे छोटे लाल बहादुर थे इसीलिए उनको नन्हे भी कहा जाता था। उनके पिता उसी गांव की शाला के अध्यापक थे लेकिन कुछ दुर्भाग्य के कारन उनके पिता का शाया उनके सर से हट गया। पिताजी के गुजरजाने के बाद दादाजी के ही संस्कार उनको मिले। लेकिन कुछ पार्थितीओ के कारण वह ज्यादा पढाई न कर पाए। ननिहाल में उन्होंने अपना प्राथमिक शिक्षण प्राप्त किया उसके बाद हाई स्कुल उन्होंने काशी में हरिश्चंद्र हाईस्कूल में जाकर विद्या हासिल की। Lal Bahadur Shastri Essay In Hindi
Lal Bahadur Shastri Essay In Hindi
लाल बहादुर शास्त्री का राजनैतिक जीवन :- तब पुरे भारत देश में भारत की स्वतंत्रता का नारा लग रहा था। गांधीजी को देख वो अपने जस्बात को काबू नहीं कर पाए और अपने जीवन को देश के प्रति व्यतीत करने का सोचा और आंदोलन में कूद पड़े। इस आंदोलन की वजह से 16 साल की उम्र में ही उनको जेल में जाना पड़ा। कोंग्रेश के प्रति उनका भोगदान देखकर उत्तर प्रदेश के पॉर्विसियल कमिटी का प्रमुख सचिव किया। 1935 में उनका राजनीती में स्वागत हुआ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा के चुनाव के बाद उनकी जीत हुई। जीत के दौरान उन्होंने कहा की अगर एक इंसान भी मेरे खिलाफ है तो भी में प्रधानमंत्री नहीं बनूँगा। स्वतन्त्रता की प्राप्ति के लिए वह अलग अलग आंदोलन में भाग लेते रहे। वैसे तो वह थे लेकिन उससे पहले वह जनसेवक थे क्युकी उन्होंने कभी भी अपने और अपने परिवार के लिए अपने होड्डे का गलत इस्तेमाल नहीं किया। यह भी पढ़े :- Ganesh Chaturthi Essay In Hindi
अगर आज के नेता लालबहादुर शास्त्री के सिद्धांत पर चले तो आज भारत देश का बहुत निर्माण हो गया होगा। उन्होंने जनता के लिए अपना जीवन को देश के निर्माण के प्रति सोप दिया। जब नहेरु जी की मूत्रयु हुई तब प्रधान मंत्री के रूप में भागदौड़ संभाला और लोगोमे उनके प्रति विश्वास और ही बढ़ाया। ब्रस्ताचार को ख़तम करने के लिए अपने द्वारा बहुत ही कठिन कदम उठाये।
1965 में पाकिस्तान ने भारत के प्रति युद्ध कर दिया। शास्त्रीजी ने बड़ी ही दृढ़ इच्छाशक्ति से हमारे देश के युद्ध के लिए तैयारी की। शास्त्रीजी जी ने सेना को दुश्मनो से निपट ने के लिए कोई भी निर्णय सेना ले सकती है ये बात की उन्होंने पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने ये निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी और सेना ने अपने नेता का पूर्ण समर्थन पाकर दुश्मनो को करारी मोत दी।
ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्पति अयुबखान के साथ युद्ध न करने की ताशकंद घोसना के बाद शास्त्री जी की मृत्यु हो गई थी। लाल बहादुर शास्त्री जी के मृत्यु के उपरांत 1966 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया। हिन्दुस्तान में लाल बहादुर शास्त्री के कारण ही सफ़ेद और हरित क्रांति आई। वो हरित क्रांति में पूरी तरह से जुड़ गए थे। लाला बहादुर शास्त्री जी ने अपने आवास के लिए लोन लिए था और वो लोन उन्होंने खेती के लिए उपयोग कर दी थी और उन्होंने ऐसा इसलिए किया की उन्हें जितने जवान पसंद थे उतने ही किसान भी पसंद थे। इसीलिए लाला बहादर शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा लगवाया था उपसंहार :- लाल बहादुर शास्त्री का एक जीवन मंत्र भी था वो ये था की हमारी ताकत और मज़बूरी के लिए सबसे जरुरी कम है लोगो में एकता स्थापित करना। लाल बहादुर शास्री हंमेशा कहा करते थे की ईमानदारी सबसे अच्छी निति है। शास्त्री जी हंमेशा से दयालु ,अग्रग्रामी सोच रखने वाले नेता थे। उनका जीवन जीने का यही एक तरीका था सदा जीवन उच्च विचार। शास्त्री जी बहोत महान थे।
Swami Vivekananda Essay In Hindi सभी धोरण 1 से 12 के लिए लिखा गया है आप इस स्वामी विवेकानंद पर हिन्दी निबंध को अपने अभ्यास और परीक्षा में उपयोग में ले सकते है।
Swami Vivekananda Essay In Hindi-स्वामी विवेकानंद पर हिन्दी निबंध
प्रस्तावना:- स्वामी विवेकानंद को भारत के महापुरुष गिने जाते है। स्वामी विवेकानंद एक महान गुरु और नेता थे। रामकृष्ण मिशन ओर रामकृष्ण मठ की स्थापना स्वामी विवेकानन्द द्वारा की गई थी। अंग्रेजो की लड़त में दूसरे महापुरुष विवेकानंद के सिधान्तो का पालन करते थे।
Swami Vivekananda Essay In Hindi
स्वामी विवेकानन्द जी प्रारंभिक जीवन:- सन 1863 जनवरी 12 को कायस्थ परिवार में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था । उनको बचपन मे नरेंद्र देव से बुलाया जाता था। उनकी माता भुनेश्वरी ओर पिताजी का नाम विश्वनाथ था। नरेंद्र देव के दादा जी संस्कृत और फ़ारसी के विद्यान थे। और पिता विश्वनाथ पेशे से वकील थ ओर माताजी धार्मिक प्रवुति करती थी। नरेंद्र बचपन से मेघावी थे और उन्होंने सन 1889 में मेट्रिक की परीक्षा पास करी ओर कोलकत्ता की जनरल असेम्बली कॉलेज में एडमिशन लिया। विवेकानंद इतिहास,दर्शन ओर साहित्य जैसे विषयो में अभ्याश किया। नरेंद्र बी.ऐ की परीक्षा में उत्तीण माक्स से पास हुए थे। नरेंद्र के पिता का दिहन्त हो गया और न चाहते हुए भी उनको नोकरी करनी पड़ी और आर्थिक कठिनाईयो का सामना करना पड़ा। ओर जब वह अपने गुरु से मिले तो उनको मा काली से प्रार्थना करने को कहा। लेकिन जब वह माँ काली के पास गए तो धन संपत्ति को छोड़कर बुद्धि और भक्ति की याचना करने लगे।और उनके अंदर भक्ति करने से धार्मिक गुणों को उद्भव हुआ और वह स्वामी विवेकानंद कहलाये गए। Swami Vivekananda Essay In Hindi यह भी पढ़े :-क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद स्वामी विवेकानन्द के गुरु :- रामकृष्ण जी को मिलने के बाद उनका संत और धार्मिक जीवन आरम्भ हुआ। उन्हीने जमज के प्रति ओर आंदोलन के प्रति अपना जीवन को ले जाने का सोचा । नेतृत्व ओर आंदोलन करके भर के पाश्रिमी देशों को परिचित कराया। उन्होंने सनातन धर्म और ज्ञान शास्त्र के अनुसार विश्वभर में लोगोको भाईचारे का संदेश दिया।सवामी विवेकानंद हमेशा सच बोलते थे और एक विद्वान थे। उन्होंने रामकृष्ण को अपना आद्यात्मिक गुरु माना और उसके बाद वह स्वामी विवेकानंद से जाने गए। उन्होंने जब रामकृष्ण मिशन की स्तनपान करी तब उनके गुरु का नाम भी रोशन किया ओर सदैव उनके गुरु को याद रखा। swami vivekanand ka nibandh
स्वामी विवेकानंद पर हिन्दी निबंध
स्वामी विवेकानंदजी का शिकागो सफर:- सन 1893 में अमेरिका के शिकागो सहर में धार्मिक विश्व समेलन हुआ था। स्वामी वेवेकानंद के शिस्यो द्वारा उनको इस समेलन में भाग लेने के लिए आग्रह किया गया। और बहुत ही कठिनाईयो के साथ इस समेलन में भाग लेने के लिए पहुचे। सब के बाद उनको मौका मिला और जब उन्होंने भाषण दिया टैब वह बैठे सभी लोग गदगद उठे और कई बार उनके समेलन ओर भाषण हुए । दुनियाभर में उनकी प्रशंसा होने लगी और उनका बड़ा ही नाम होने के बाद यूरोप और कई देशों में उनके शिस्यो की संख्या भी बढ़ने लगी । Swami Vivekananda Essay In Hindi
स्वामी विवेकानंद भारतीय आंदोलन:- अमेरिका में शिस्यो को ज्ञान देने के 4 साल बाद वह भारत लौटे ओर उनका भव्य स्कागत किया गया क्योंकि उन्होंने उनके नाम के साथ साथ भारत देश का भी नाम रोशन किया। भारतीय अद्यात्मक प्रसार के बाद रामकृष्ण मिशन की स्थापना करी ओर इस मिशन के सफलता के बाद उन्होंने बहुत श्रम किया जिससे उनका स्वास्थ्य संतुलन बिगड़ गया। ओर 4 जुलाई 1902 की रात्रि को उनके प्राण चले गए। उठो जागो ओर धैय प्राप्ति सुधि मंड्या रहो वह उनका सिद्धान्त था। पूरा भारत देश इस सिद्धांत को बहुत ही महत्वपूर्ण लेखों में लिखा गया है। swami vivekananda par nibandh
उपसंहार :- स्वामी विवेकानंद जैसे ही जीवन में अगर कुछ करना है तो अपने ध्येय को चुनो और जब तक उसे हाशिल न कर सको महेनत करते रहो। स्वामी विवेकानंद अपने भाषणों से दुनियाभर में प्रसिद्ध थे और उन्होंने अपने नाम के साथ देश का और उनके गुरु रामकृष्ण का भी नाम रोशन किया। वैसे ही उनका एक सुविचार था ''ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है.''
रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध सभी धोरण 1 से 12 के लिए लिखा गया है आप इस Hindi Essay on Rani Laxmi Bai को अपने अभ्यास और परीक्षा में उपयोग में ले सकते है।
Hindi Essay on Rani Laxmi Bai - रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध
प्रस्तावना : रानी लक्ष्मीबाई भारत की वीर रानी थीं। भारत देश के महिलाओ का गौरव थी रानी लक्ष्मीबाई। रानी लक्ष्मीबाई जिन्होंने हस्ते हस्ते रणभूमि में अपने प्राण त्याग दिए थे। सब के लिए उनका जीवन कुछ प्रेरणा लायक है क्युकी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम जो की 1857 में लडा गया था वह संग्राम उनके रक्त से लिखा गया था। रानी लक्ष्मीबाई का मानना था की सच्चा वीर कोई भी आपत्ति औ से नहीं घभराता। वीर का चरित्र अनुकरणीय और उनका लक्ष्य उच्च स्तर का होता है।
Hindi Essay on Rani Laxmi Bai
रानी लक्ष्मीबाई का जीवन : 19 नवम्बर 1835 में रानी लक्ष्मीबाई का जन्म काशी में हुआ था। रानी लक्ष्मीबाई का वास्तविक नाम मनुबाई था। जो की पेशवा राव की बहन मानी जाती थी। पेशवा राव रानी लक्ष्मीबाई को छबीली कहकर भी पुकारते थे। लक्ष्मीबाई का पालन पोषण बिठूर में हुआ था। रानी लक्ष्मीबाई लड़को और पुरुष जैसे खेल पसंद करती थी जैसे की तलवार चलना , घोड़ेसवारी ,तीर कमठा और भी कई। वैसे ही उनके अंदर पुरुष के गुण और ताकत थी। किसी भी खतरे से लड़ लेने की हिम्मत रखती थी। लक्ष्मीबाई के हृदय में बाजीराव पेशवा ने अपनी कहानियोसे प्रेम भर दिया था।
लक्ष्मीबाई का विवाह:- झांसी के राजा श्री गंगाधर राव के साथ 1842 में लक्ष्मीबाई का विवाह घोषित किया गया था और 1850 में विवाह हुआ था। उसके बाद में उनको पुत्र की प्राप्ति हुई थी। लेकिन अफ़सोस वह तीन महीने बाद ही चल बसा और जंगाधर की तबियत ख़राब हो गयी। और फिर भी लाक्षीबाई घभरायी नहीं और हिम्मत रखकर आगे बढ़ी। गंगाधर ने अपने परिवार के पुत्र को दत्तक ले कर अंग्रेजी सेना के सामने घोषणा की लेकिन उन्होंने उनका दत्तक पुत्र अष्विकार किया और रानी लक्ष्मीबाई को असहाय और निराधार बताकर झांसी छोड़कर जाने के लिए कहा। लेकिन रानी लक्ष्मीबाई ने उत्तर में कहा की जब तक में जीवित हु झांसी मेरी है।
रानी लक्ष्मी बाई पर निबंध
रानी लक्ष्मीबाई की मृतु:– 1858 में ऐतिहासिक युद्ध में लक्ष्मीबाई के कहने के अनुसार टॉप और लक्ष साधकर गोले फेककर अंग्रेजी सेना के छक्के छूटा दिए थे। अंग्रेजी सेना एक मामूली स्त्री समझकर झांसी रानी पर हमला कर देते थे लेकिन लाक्षीबाई बहुत ही चतुर और शानी थी वह सेना के साथ हमेशा तैयार रहती थी और अपने राज्य में घुसने ही नहीं देती थी। लेकिन अंत में लक्ष्मीबाई को झांसी से भागना पड़ा और अंग्रेजी सेना के साथ ग्वालियर में बहुत ही युद्ध किया और उस दौरान उनकी मृत्यु हो गयी। वीरतापूर्वक उन्होंने अंग्रेजी सेना का मरते दम तक सामना किया लेकिन हार नहीं मानी।
उपसंहार : अंग्रेजी सेना से सेनापति सम्पूर्ण सकती के साथ रानी लक्ष्मीबाई का पीछा करते थे और सही समय देखकर उनकी हत्या करदी। नारी हो कर भी अंग्रेजी सेना के जीते जी छक्के छूटा दिए थे। उनसे कुछ प्रेरणा नारीत्व को मिलती है की वह भी पुरुष से काम नहीं है। अपने राज्य को बचाने का संघर्ष करने वाली और अपना प्राण त्यागने वाली झांसी की रानी की कहानी थी।
Chandrashekhar Azad Essay In Hindi को सभी छात्र 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के लिए लिखा गया है।क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद पर निबंध को आप नए आने वाली परीक्षा में उपयोग में ले सकते है।
क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद - Chandrashekhar Azad Essay In Hindi
चंद्रशेखर आजाद एक भारतीय क्रांतिकारी थे। चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। चंद्रशेखर आज़ाद के पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी था और उनकी माता का नाम जगदानी देवी था। वो एक गरीब परिवार से थे। चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्यप्रदेश में झाबुआ जिले में भाबरा नामक शहर में हुआ था। चंद्रशेखर को कही गुण उनके पिता में से मिले थे जैसे की ईमानदारी ,स्वाभिमानी , वचन में पक्का होना। चंद्रशेखर आजाद ने अपनी प्राथमिक शिक्षा भाबरा में प्राप्त की थी यही नहीं चंद्रशेखर को धनुष चलाना और तीर छोड़कर शिकार करने का भी बहोत शोख था।चंद्रेशखर आज़ाद का गांव भाबरा आज आजादनगर के नाम से जाना जाता है। Chandrashekhar Azad Essay In Hindi
चंद्रशेखर आज़ाद को नेतृत्व का बहोत शोख था। चंद्रशेखर 14 साल की आयु में बनारस गए थे और उन्होंने वह संस्कृत पाठशाला में पढाई की थी और उन्होंने वहा कानून भंग आंदोलन में अपना योगदान दिया था। वो जिस पाठशाला में पढ़ते थे वहा पर निशुल्क सेवा और भोजन की व्यवस्था थी। चंद्रशेखर आजाद 1920 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े और सभकुछ त्यागकर वो देश के स्वतंत्र संग्राम में जुड़ गए थे। चंद्रशेखर आजाद एक बहादुर वीर की तरह स्वतंत्र संग्राम में जुड़े थे। चंद्रशेखर आज़ाद अविवाहित थे उन्होंने ब्रह्मचारी का जीवन व्यतित किया था और उन्होंने यह ब्रह्मचारी का जीवन उस पाठशाला में भी शुरू किया था। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद
जब वो गांधीजी क साथ आंदोलन में जुड़े थे तब वो गिरफ्तार भी हुए थे। जब वो जज के समक्ष प्रस्तुत किये गए तब चंद्रशेखर आज़ाद ने अपना नाम आज़ाद ,पिता का नाम स्वतंत्रता और जेल को उनका निवास बताया था और जेल में चंद्रशेखर को 15 कोडो की सजा भी दी गई थी और वो हर कोडे के साथ चंद्रशेखर ने वन्दे मातरम और गांधीजी की जय का स्वर बुलंद किया था। जेल में अंग्रेजो ने चंद्रशेखर को बहोत पीटा था। Chandrashekhar Azad Essay In Hindi इन सब के बाद वो सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाये थे। जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ था तब चंद्रशेखर आज़ाद उस तरफ खींचे और हिंदुस्तान सोशलिस्ट आर्मी में जुड़े थे। चंद्रशेखर आज़ाद की एक बड़ी खासियत थी की ना वो दुसरो पर जुल्म करते थे और नाही स्वयं जुल्म सहन कर सकते थे।
1919 में जलियावाला बाग में कांड हुआ था। जलियावाला कांड ने उन्हें हिलाकर रख दिया था। चंद्रशेखर उस समय पठाई कर रहे थे तभी से उनके मन में यही चल रहा था और उसी बात पर वो ज्यादा सोचा करते थे और उन्होंने यह तय कर लिया था की वो अपने देश के लिए कुछ भी करेंगे। जब महात्मा गाँधी द्वारा असहयोग आंदोलन ख़त्म होने पर सेकड़ो छात्रों के साथ चंद्रशेखर भी सडको पर उतर गए और आंदोलन किया और वो उसी आंदोलन में गिरफतार हुए जैसे मैंने ऊपर कहा वैसे उनको सजा दी गई थी। 1921-22 में गांधीजी द्वारा चलाये गए आंदोलन को अचानक बंध करदेने के कारण विचारधारा में बदलाव आ गया और वे क्रन्तिकारी गतिविधियों में जुड़ गए तभी से चंद्रशेखर आजाद हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसियेसन के सक्रीय सदश्य बन गए। 1 अगस्त 1925 को काकोरी कांड हुआ था। चंद्रशेखर ने क्रांतिकारी बनने बाद पहली बार कांकोरी कांड को अंजाम दिया था और इन सब के बाद में हिंदुस्तान रिपब्लिक असोसियेशन का गठन और इसके बाद 1927 में बिस्मिल के साथ चंद्रशेखर ने उत्तर भारत की सभी क्रांतिकारी पार्टिओ को मिलाकर इन सभी को एक करके एक नया गठन किया जिसका नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसियेशन का नाम दिया। Chandrashekhar Azad Essay In Hindi उन्होंने समाजवादी का आह्यन अल्फ्रेंड पार्क इलहाबाद ने 1931 में किया था। ऐसे वीर चंद्रशेखर का जन्मस्थानं आजादनगर माना जाता है।